Uncategorized
-
गिरता रूपया हमारी साख पर सवाल है।।
विश्व के बाजार में भारत डगमगा रहा है,डाॅलर हमको दिन में भी तारे दिखा रहा है।वो हमारा फूंफा टैक्स पर…
Read More » -
अंधेरी सुरंग का द्वार
पहाड़ी के ऊपर से आई वह दूसरी कराहपहली से भी अधिक दर्दनाक थी—जैसे कोई वर्षों से बंद पड़ा घावअचानक फट…
Read More » -
हवाओं ने इशारों से…
हवाओं ने इशारों से तुम्हें तो कुछ कहा होगा,तुम्हारी नर्म-सी रूह को शायद छू गया होगा। बहुत नाज़ुक हो—अभी तुमको…
Read More » -
विश्व विकलांग दिवस
बन ना सको आसक्त जनों कासहारा तो कोई बात नहीं।है, यह एक शारीरिक कमजोरीकोई अभिशाप नहीं। करें सुनिश्चित उनके अधिकारों…
Read More » -
मोक्ष के पथिक
मोक्ष के पथिकअधूरी आवाज़ों का साया पहाड़ी की ओर से आई वह कराहती हुई आवाज़ अभी भी हवा में तैर…
Read More » -
विश्वास
मानव-चेतना में संवेदना, साहस, विश्वास और वृत्ति वे चार मूल शक्तियाँ हैं जो मनुष्य के विचारों, व्यवहार और निर्णय-प्रक्रिया को…
Read More » -
कल्प कथा मंजूषा मंच पर रजत रश्मियों सी सजीं मधु वशिष्ठ की कथाएं।
संवेदना और अनुभव शब्दों का आकार लेकर कहानी बन जाते हैं। – चन्द्रप्रकाश गुप्त चन्द्र बुंदेला प्रभु श्री राधा गोपीनाथ…
Read More » -
साधन पाद सूत्र– ४
अविद्या क्षेत्रमूत्तरेषां प्रसुप्ततनु विच्छिन्नोदाराणाम् । अविद्या= अविद्या है; क्षेत्रम्= कारण; उत्तरेषाम्= जिसका वर्णन {तीसरे सूत्र में} अविद्या के बाद किया…
Read More » -
साधन पाद सूत्र– ३
अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशा: क्लेशा: । अविद्यास्मिताराग द्वेषाभिनिवेशा:= अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश {ये पाँचों}; क्लेशा:= क्लेश हैं ।अनुवाद– अविद्या, अस्मिता, राग,…
Read More » -
तीसरी परछाई का प्रगट होना
( गाँव का सबसे गहरा, सामूहिक पाप ) गुलनारी की परछाई जैसे ही हवा में घुली,रात अचानक और भारी हो…
Read More »








