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  • दूसरी परछाई का उदय

    धरमवीर की परछाईहवा में घुलकर जैसे गायब हुई,पर उसके जाते हीरात का सन्नाटा और भारी हो गया।लोगों ने सोचा—शायद अब…

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  • आज का दर्द

    आज हर इंसान तनिकडरा हुआ सा रहता है,लगता है हर समयकोई निगरानी करता है।मोबाइल में ऑनलाइनखरीददारी में डर लगता है।किसी…

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  • पापा की परी।।

    पलकों पे रखा एक सपना सजाकर,जहाँ को दिखाना है बेटी को आईएएस बनाकर।मेरे विश्वास की आखरी उम्मीद है बेटी,अपनी मम्मी…

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  • पुस्तक समीक्षा – कोमल भावों की सरस सरिता – काव्य-संग्रह प्रणय धारा

    श्रीमती शोभा शर्मा जी का काव्य-संग्रह ‘प्रणय धारा’ प्रेम, समर्पण, विरह, वेदना और मानवीय संवेदनाओं का ऐसा सुरम्य प्रवाह है,…

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  • पंचतत्त्व में बसे भगवान

    धरती जैसी मजबूती हो, मन में शांति रहे,नम्र बने व्यवहार हमारा, किसी से बैर न रहे।हर दर्द को मुस्कान बना…

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  • भगवान

    (१) भ — भक्ति और भाव का स्वरूप “भ” से भक्ति जन्म लेती, मन हो जाता शांत,ईश्वर स्मरण करे जो,…

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  • अनुत्तरित प्रश्न

    उठते हैं, अनुत्तरित प्रश्न कई!कई, जिज्ञासाएं मचलती हैं ।मानव अभिलाषाएं ही अक्सर!नए अविष्कार करती हैं। उलझते प्रश्नों के झंझावातशांत कहां…

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  • गीता जयंती

    शीर्षक-अर्जुन का विषाद (सांख्य योग) ​अर्जुन का है विषाद महान,रथ के मध्य खड़े हैं मौन।तब बोले कमल नयन भगवान,मोह छोड़…

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  • ये आखिरी महीना “दिसंबर”

    शीर्षक – “जाता हुआ दिसंबर”विधा – कविता​खामोश खड़ा है आँगन में यह, जाता हुआ दिसंबर।दरवाज़े पर दस्तक देती, करवट लेती…

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  • जीवन की राह

    विधा – कविताश्रेणी – जीवनमौलिक रचनारचनाकार – कौशल जीवन एक सफ़र है प्यारा, हर पल इसका रूप निराला,कभी सूरज-सी तपन…

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