Uncategorized
-
मेरी मनपसंद सब्जी खाओ।।
देखो सर्दी का मौसम आया है,ठंड से ठिठुरते लोगों को पाया है।किसी को अलाव तापते देखा है,कहीं किसी ने खाने…
Read More » -
गीता का सार
व्यक्ति को, आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ,गीता ही ,ले जाती है।जीवन के दुखों, भय और व्यर्थ चिंता से,गीता ही,मुक्ति दिलाती…
Read More » -
ये आखिरी महीना ”दिसंबर”
विधा- कविताशीर्षक- लो ठंड आई वर्ष का आखिरी महीना,दिसंबर आया है।ठंड की चादर ओड,दस्तक दे पाया है।। सूरज की धूप…
Read More » -
संवेदना
मन में धूप जगी जब, पावस भाव उमंग।संवेदित पुलकित मन, जागे कोमल रंग।। जीवन सफल वही है, जहाँ हृदय उदार।संवेदित…
Read More » -
बाल कवियों की उर्वर कल्पना की उड़ान से सुरभित हुआ कल्पकथा काव्यगोष्ठी मंच।
होनहार विरवान के होत चीकने पात कहावत मेधावी बाल प्रतिभाओं पर एकदम सटीक बैठती है – कल्पकथा परिवार प्रभु श्री…
Read More » -
स्वर कोकिला लता मंगेशकर
“ये जो आवाज सबके तन और मन मेंसमाई हैये तो स्वर्ग कोकिला लता ने अपनी सुर लय की छटा बिखराई…
Read More » -
(no title)
पति तपावनी गंगा बूंद-बूंद संगृहीत कर अपनावजूद से बड़ा बनाती हैआगे बढ़ना ही जीवन हैनदियां में हमें सीखाती हैं “गंगा…
Read More » -
गीता जयंती
पद १मार्गशीर्ष की एकादशी, पर्व पावन महान,ज्ञान दीप जलाने वाला, जीवन को दे ध्यान।कुरुक्षेत्र की धरती पर, हुआ सत्य का…
Read More » -
उजालों का पहरा नहीं रहा
ज़हर-सी बातों का असर हवाओं पर नहीं रहा,ओस भी अब शफ़्फ़ाफ़ अपने आँचलों में नहीं रहा। शहर–शहर धूप बदनाम होकर…
Read More » -
मोक्ष के पथिक
पहली परछाई का चेहरा चौराहे पर खड़ी वह आकृतिजैसे हवा में गढ़ी हुई कोई धुंध थी—धीमे-धीमे नज़दीक आती हुई,पर फिर…
Read More »








