
जिस पर अहंकार का साया होता है
उसके लिए अपना भी पराया होता है
अहंकारी यहां कहां कोई होता है
सब अपनी किस्मत का खाते हैं
कौन कोई किसको खिलाता है
मतलबी दुनिया में कोई न अपना
न ही कोई पराया होता है
मतलब निकल जाने के बाद तो
अपना सगा भी पराया हो जाता है
अहंकारी किसको माना जाता है
मदद न करना अहंकारी कहलाता है?
हर एक में अहंकार हो श्रेष्ठतम बनने का
मन में घमंड न आए किसीका बुरा करने का।
गोवर्धन थपलियाल












