ज्ञान और विज्ञान से खुलेंगे हनुमान जी के जन्म रहस्य, बोलतीं कलम मंच से मनन से

मानस कार्यक्रम का नवीन सत्र शनिवार को उत्साहपूर्ण ढंग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संजय राय साईं ने किया जिन्होंने श्रोताओं का स्वागत करते हुए आज के विषय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। मंच पर कुसुम रानी सिंह जी ने प्रश्न के उत्तर में भगवान हनुमान के तीन नामों पवनपुत्र, रुद्रावतार और केसरी नंदन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थों पर प्रकाश डाला।
कुसुम रानी जी ने बताया कि पवनपुत्र का स्मरण जीवन में सहजता, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। रुद्रावतार के नाम से हनुमान जी की विनाशक पराक्रमी शक्ति और दुःखों का नाशक रूप उभरता है; जबकि केसरी नंदन नाम प्रेम, भक्ति और पारिवारिक मूल्यों के संवाहक के रूप में उनकी मानवीय पहचान को संजोता है। उन्होंने प्रत्येक नाम के पीछे छिपे नैरेटिव और लोक-परंपराओं का सन्दर्भ देते हुए श्रोताओं को भावनात्मक और वैचारिक स्तर पर जोड़ने की कोशिश की।
अध्यक्षीय टिप्पणी में संदीप जी ने इन व्याख्याओं का विश्लेषण करते हुए बताया कि हनुमान जी के इन नामों को केवल आस्था के प्रतीक के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए अपितु वे व्यक्तित्व निर्माण, धैर्य और सेवा भाव के आयाम भी बतलाते हैं। संदीप जी ने आधुनिक संदर्भों में इन उद्देश्यों के प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि धार्मिक कथानक आज के नैतिक और भावनात्मक संकटों के समाधान का मार्ग भी सुझाते हैं।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में डॉक्टर सुप्रीति चावला ने चर्चा को एक अनूठा मोड़ देते हुए आध्यात्मिक ज्ञान और वैज्ञानिक भाषा के बीच सेतु बनाने का प्रयास किया। उन्होंने ‘क्वांटम एनर्जी’, ‘थर्मोडायनेमिक्स’ और ‘जेनेटिक्स’ जैसे वैज्ञानिक शब्दों का उपयोग करते हुए बताया कि कैसे प्राचीन आध्यात्मिक अनुभूतियों को समकालीन वैज्ञानिक फ्रेमवर्क में समझा और व्याख्यायित किया जा सकता है। डॉक्टर चावला के अनुसार हनुमान जी के नामों में निहित गुण उर्जा, परिवर्तनशील शक्ति और स्थायित्व को क्वांटम-सूत्रों और जैविक प्रणालियों के संदर्भ में रूपांतरित किया जा सकता है, जो आध्यात्मिकता को वैज्ञानिक गंभीरता देता है।
यह बहुपक्षीय संवाद श्रोताओं के लिए जानकारीपूर्ण और प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोतागण ने मंचस्थ वक्ताओं के विचारों को सराहा और कहा कि इस मिश्रित दृष्टिकोण ने पारंपरिक कथानक और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सार्थक संवाद को आरम्भ किया है।
आयोजकों ने बताया कि मनन से मानस का अगला सत्र आने वाले शनिवार को आयोजित किया जाएगा, जिसमें हनुमान चालीसा के वैज्ञानिक एवं नैतिक पक्ष और समकालीन समाज में उसके अनुप्रयोग पर गहन विमर्श किया जाएगा।
संस्थापक – संजय राय साईं
मीडिया प्रभारी – प्रिया कॉम्बोज प्रिया
बोलती कलम परिवार के सौजन्य से।












