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अंत जब जीवन के द्वार खटखटाता है,

अंत जब जीवन के द्वार खटखटाता है,
मन अक्सर भय और शोक से भर जाता है,
लगता है जैसे सब कुछ पीछे छूट गया,
सपनों का आकाश भी कहीं टूट गया।

बिखरे हुए पन्नों को समेटते-सहेजते,
हम अपनी ही यादों में खो जाते हैं,
पर समय की धारा चुपचाप कहती है,
“रुकना नहीं, नए सवेरे भी आते हैं।”

डूबता सूरज भी हार नहीं मानता,
वह अगली भोर का वचन निभाता है ,
पतझड़ की सूनी शाखों पर भी देखो,
बसंत फिर से हरियाली सजाता है।

हर बिछड़न में एक मिलन छिपा होता है,
हर आँसू में एक मोती पला होता है,
जो समाप्त हुआ, वह अंत नहीं केवल,
नई राहों का पहला सिलसिला होता है।

जीवन की यही सबसे सुंदर रीत है,
विराम के बाद ही नई संगीत है,
हर अँधेरे की गोद में उजाला पलता है,
हर अंत में एक नया सवेरा चलता है।

तो टूटकर भी मुस्कुराना सीखो,
बुझकर भी दीप जलाना सीखो,
क्योंकि ईश्वर की हर रचना यही कहती है—
“अंत केवल एक पड़ाव है,
नई शुरुआत उसका अगला अध्याय है।”

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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