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प्रदत्त शब्द — आषाढ

सार छंद सृजन

पावन शुभ आषाढ़ मास है,नभ की घटा सुहानी।
प्यासी धरती हर्षित होकर,गाए मधुर कहानी।
दादुर गाते मोर नाचते, खेत खड़े मुस्काते।
जीवन में नव आश जगाकर,बादल जल बरसाते।

बिजुरी चमके, घन गर्जन से, गूँजे सकल दिशाएँ।
पुरवा रथ पर बादल घूमें,अद्भुत दृश्य दिखाएँ।
तन-मन में उल्लास भरें ये, सावन की अगवानी।
प्रकृति सुखद संदेशा देती, ऋतु यह बड़ी सुहानी॥


डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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