
।विधा कविता।
जिस प्रकार हर किसी को अपना अपना जीवन जीने का अधिकार होता है,
ठीक उसी प्रकार हर किसी को अपने अपने जीवन में यह कर्तव्य भी होता है।
की अपने अपने माता पिता का सेवादारी करें और उनकी देख भाल करें,
न की अपनी बीवी के बहकावे में आकर अपने माता पिता को अनादर करें।
क्योंकि आज अगर आप अनादर करोगें तो कल आपका भी अनादर होगा,
माना कि आज कल के बच्चे कुछ होसियार समदार होतें है मगर लेकिन होतें हैं।
क्योंकि जो जैसा कर्म करता है साहेब वैसा ही फल पा जातें हैं,
आज नहीं तो कल साहेब उनके खाते में जमां हो जातें हैं।
इसीलिए कहता हूँ साहेब जितना अधिकार रखते हो अपने माता पिता पर,
उतने ही अधिकार से कर्तव्य भी करना और करते रहना अपने माता पिता के लिए।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













