
सफेद लिबास में लिपटा,
करुणा का अवतार है,
मरीज़ की आँखों में जो,
जीवन का संसार है।
नींद बेचकर रातों की,
वो जागता है हरदम,
दूसरों के चेहरे पर,
लाता है मुस्कान हरदम॥
स्टेथोस्कोप गले में,
और हाथ में दुआ है,
हर धड़कन में उसके,
इंसानियत समाई है।
थकान का पता नहीं,
न हार का नाम है,
उसके लिए हर रोगी,
अपना ही परिवार है॥
जब सब रिश्ते डर जाएँ,
बीमारी के सामने,
वो खड़ा रहता है,
उम्मीद बन सिरहाने।
दवा के साथ दुआ दे,
मरहम भी लगाते हैं,
वो धरती पर साक्षात,
ईश्वर कहलाते हैं॥
चिकित्सक दिवस की
हार्दिक शुभकामनाएँ,
उन हाथों को सलाम,
जो जिंदगी बचाते हैं।
आदित्य सर्वे संतु निरामया
सर्वे भद्राणि पश्यन्ति माँ
कश्चिद दुख भाग भवेत॥
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













