
मुखड़ा
तुम हो मेरे हृदय पटल पर,
तुम ही हो संसार मेरा।
साँस-साँस में नाम तेरा है,
तुम ही हो बस प्यार मेरा।।
चाँदनी रातों में जब भी,
तेरी याद झिलमिलाए।
धड़कनों की धुन में बस तू,
हर सुबह तुझको ही पाए।
तेरे बिना सूना सा मन है,
जैसे हो बिन प्यार सवेरा।।
तुम ही हो बस प्यार मेरा।।
तेरी हँसी ज्यों रौशनी सी,
तेरी चुप बोले हज़ार।
तेरी छुअन से महके जीवन,
जैसे हो सावन बहार।
तेरा होना है ज़िंदगी का,
एक ही आधार मेरा।।
तुम ही हो बस प्यार मेरा।।
तू ही दीप तू ही बाती,
तू ही मेरी पूजा है।
हर साँस तुझसे जुड़ जाए,
तू ही मेरी दूजा है।
हर जनम तुझको ही चाहूँ,
तू ही तो संसार मेरा।।
तुम ही हो बस प्यार मेरा।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













