
तूंहीं दया माया है और तूंहीं जग संसार है
सुन कन्हैया रे तेरी माया अपरम्पार है
तेरे बिना कुछ भी नहीं सब कुछ बेकार है
सुन कन्हैया रे तेरी माया अपरम्पार है
तेरे बिना सुखा नहीं तेरे बिन बरसात है
तूंहीं काल चक्र है और तूंहीं दिन रात है
तेरे बिना जग में चारों ओर अंधकार है
सुन कन्हैया रे तेरी माया अपरम्पार है
तूंहीं आदी अनंत है और तूंहीं आदिनाथ है
तेरे अतिरिक्त कोई नहीं तूंहीं कायनात है
लेखक अलबेला पर कान्हा तूंहीं सवार है
सुन कन्हैया रे तेरी माया अपरम्पार है
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













