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विशव अंगदान दिवस

विधा कविता

दान करों कुछ दान करों इस जग में रह कर साहेब कुछ तो है दान करों।

भले न सोना चांदी हो लेकिन थोड़ा ही साही कुछ तो अन्नदान करों।।

किसी को कपड़ा किसी को अन्न तो किसी को अंगदान करों।

जिसको जो जरूरत है साहेब उसको तुम वही दान करों।।

लीवर किडनी हो चाहे फिर आंख हो आऔ रक्त दान करें।

क्योंकि यह जीवन है कुछ पल का और कुछ पल का ही रह जाएगा।।

न जाने कब कहां और कैसे यह जीवन माटी में मिल जाएगा।

जाने से पहले इस जग से अपना कुछ तो अंगदान करें।।

आऔ हम सब मिलकर संकल्प करें जरूरत मंदो को हम मदद करें।

चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,

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