
मैं हूँ इससे अनभिज्ञ नहीं
कि मेरा जग में कोई अस्तित्व नहीं
मैं तो हूँ सिर्फ तिनका मात्र
हा मुझे है इसका अहसास
आपका प्रभु जब मुझे
साथ मिल जाते है
एक ही कमी हैं मुझ में
मेरे अहम प्रबल हो जाते है
जबकि मुझे भी है ऐ ज्ञात
कि प्रभु आप ही सब के भाग्य विधाता हैं
मेरी खुशियो के दाता है
मैं निर्बल कमजोर सही
प्रभु आपके साथ से सबल बनी
मेरे सारे कार्य करते हो आप
आपको साथ पा यदि मुझे
अहम हो अहसास
तो मुझको प्रभु आप कर देना माफ
हे सारे प्रभु आपसे विनती है
मुझ जैसी अज्ञानी की कर देना
अब आप भवसार से नैया पार
सदैव रखना सुरक्षा कवच अपार
शीलू जौहरी भरूच













