
दर्शन दो नंदलाल अब,बैठ तुम्हारे द्वार
करती नित आराधना,मन में कृष्ण पुकार।
दर्शन दो नंदलाल तुम, दर्शन की है आस।
नैन नीर बहता रहे,बीते कितने मास।।
यमुना तट पर बज रही,बंसी मीठी तान।
राधा सुध बुध खो चुकी,तरस गए थे कान।
राधा के मन मोहना,जग के हैं मीत।
कान्हा की भक्ति करें,जोड़ें मन की प्रीत।।
डॉ. नवनीता दुबे नूपुर













