
बगिया में जब पुष्प खिले
फैली जब उसकी प्यारी महक।
मंद मंद जब पुरवइया चलती
मन में भरती मधुर लहक।
रंग बिरंगे पुष्प है खिलते
जैसे हो सपनों का संसार।
पुष्पों पर भौंरे है मंडराते
तितली भी आकर करती प्यार।
पुष्प खिलकर मुस्काना सीखाते
बिन स्वार्थ के सेवा में चढ़ना।
जीवन चाहे जैसा भी हो
हर पल हंसते आगे बढ़ना ।
पुष्प की महक हमें सिखाए
एक सुंदर जीवन जीना।
खुद टूटकर सेवा में चढ़े
और सिखाए परोपकारी बनना।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़













