
तीज़ के बरतिया करूँ, मोहे पिया-पिया जी,
सिंदूर, मेहंदी, बिंदिया, आलता संग सजूँ।
सोलह श्रृंगार रूपवा धरूँ मैं आज,
देखूँ तोहर मोहनी सुरतियाँ, पिया जी॥
मन में श्रद्धा और उपवास रख,
शिव-शक्ति की उपासना करूँ आज।
मिट्टी के गौरा-गौरी परिवार बनाऊँ,
तीज़ का व्रत करूँ मैं आज॥
निर्जला व्रत करूँ मैं, तीज माता,
रखना सदा सुहागन हमको, तीज माता।
हरी-भरी रहें बगिया हमरी, महके,
आँगन में दो प्यारे फूलवा चहके॥
जन्म-जन्म तक, सातों जन्म तक,
अपन पिया का साथ मैं पाऊँ।
चाहे जीवन में कोई भी मौसम आए,
प्रेम से हर मौसम को सावन बनाऊँ॥
कवयित्री ज्योति बरनवाल
नवादा (बिहार)













