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अंकुश

अंकुश सदा मन को दिये रखो
लोभ,क्रोध,तृष्णा से बचते रहो
शति,प्रेम,करुणा का पाठ पढो
जीवन मे सदा अग्रसर बने रहो ।

अंकुश कष्ट नही,सुख है देती
रिश्ते,दोस्त,परिजन को है संभालती
हट जाये अंकुश तो,समझ लो
जीवन के सारे,कुसंगति खुल है जाती ।

लोग कहते है कुछ ,कुछ हमे कि
अंकुश लगाये वो,रखते है सबके
ठीक नही है व्यवहार मे वो हम सबके
भूल है ये उनके वो,खुश है अंकुश से जबकि ।

अंकुश कोई किसी आजादी नही छीनता
ब्लकि गलत होने से है,उसे रोकती
जो इस बात को समझ है लिये
वो,कभी अंकुश का विरोध नही है करती ।

चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड
कवि लेखक सह शिक्षक

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