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माँ ब्रह्मचारिणी

दिनाँक- 12-10-2026
विधा- पद्य (द्वितीय दिवस

ब्रह्मचारिणी मातु कमल कर,
पुष्पधारिणी, जप माला।
वायें हाथ कमण्डल शोभित,
अरुण वसन, मुख पै आभा।।

नाम अपर्णा, उमा, गौरी तुम,
जैसे ऊषाकाल प्रभा।
ऐसी ज्योति दमकती तुम्हरी,
जहाँ प्रकट हो, लगे सभा।।

लाल कमल, गुड़हल तुमको प्रिय,
कंद, मूल-फल खाती हो।
लाल पुष्प संग श्वेत अक्षत है,
प्रिय तुमको, मुस्काती हो।।

महादेव हित किया कठिन तप,
तपबल से पाया उनको।
बनी प्रिया पत्नी शिव की तुम।
ब्रह्मचारिणी कहें इनको।।

जटा-जूट सिर गंगा, शशिधर,
कहलाते गौरा के नाथ।
जगत पूजता दोनों को नित,
मम नित नमन सतत् पद माथ।।

रचनाकार-
जुगल किशोर त्रिपाठी (साहित्यकार)
बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

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