
दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र की अनुशंसा पर ग्लोबल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, अमेरिका ने प्रदान की उपाधि
पलक्कड़ (केरल)। हार्टफुलनेस रिट्रीट सेंटर मलमपुझा में आयोजित मलयगिरि आध्यात्मिक चेतना शिविर व उत्तर भारत-दक्षिण भारत संस्कृति मिलन एवं सम्मान समारोह के दौरान दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र से अपना शोध कार्य पूर्ण कर चुके सात शोधार्थियों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। इन सभी शोधार्थियों के नामों की अनुशंसा केंद्र की ओर से ग्लोबल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, अमेरिका से की गई थी। समारोह में यह सम्मान उनकी विशिष्ट उपलब्धियों, अनुभवों और समाज के प्रति योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से प्रदान किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा कि विशेष उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले महानुभाव समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उनकी जीवन यात्रा, कार्यों के प्रति समर्पण और अनुभव आने वाली पीढ़ियों को बेहतर कार्य करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि शोध एवं ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब उसका उपयोग मानवता के कल्याण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के लिए किया जाए।
डॉ. अभिषेक कुमार ने इस उपलब्धि को शोधार्थियों की शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि ज्ञान, अनुभव और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय से ही एक बेहतर समाज का निर्माण संभव है। दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र का उद्देश्य भी शोध, विचार, साहित्य और मानवीय मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का प्रसार करना है।
समारोह में राजीव भारद्वाज, अजीत कुमार जैन, विनय श्रीवास्तव, प्रकाश चंद टेलर, आनंद कृष्णन एड़ेचेरी, वैभव कांत तथा महंत सुधीर दास शास्त्री जी महाराज सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद, आपसी सहयोग तथा मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित करने के संकल्प को भी मजबूती प्रदान की।
इस आयोजन के माध्यम से शोध, संस्कृति, साहित्य और मानवता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के साथ-साथ समाज में ज्ञान एवं सकारात्मक कार्यों के प्रति प्रेरणा का संदेश दिया गया।













