
विषय : पद्य
समय अभी अड़ा नहीं है ,
राम अभी खड़ा नहीं है ।
नहीं अभी राम की सीता ,
रावण अभी मरा नहीं है ।।
नहीं हैं दशरथ कौशल्या ,
विश्वामित्र कहाॅं से आए ।
न अभी जन्म जनक का ,
शिव धनु कैसे टूट पाए ।।
नहीं उपदेश अभी गीता ,
नहीं अभी धरा में सीता ।
कैसे ये शिव धनुष भंजन ,
कैसे आए रावण कुरीता ।।
है रावण का कोप छाया ,
अभी न आदिशक्ति माया ।
त्रेता रावण त्रेता में मरा ,
ऋषि शाप अभी न पाया ।।
रावण सबको है भरमाया ,
मृत्यु अभी सर न मॅंडराया ।
भर रहा दशानन दंभ अभी ,
शनि विपरीत नहीं आया ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













