
काली आई है महाकाली आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
कालों के काल माँ काली आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
कालरात्रि में माँ कालरात्रि आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
भूतों के माला पेहने माँ काली आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
हाथों में खप्पर माँ त्रिशूल लेकर आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
कालों को काल तक माँ पहुचाने आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
माता भक्तों का उद्धार करने आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
खुशी बेशुमार माँ आज लेकर आई है,
खर पे सवार माँ कालरात्रि आई है।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













