
जीवन में परिवर्तन हमेशा होते रहते हैं, समस्याएं भी बहुत आती रहती हैं। हमें इन समस्याओं को सुलझाना और आगे बढ़ना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
“हर मुश्किल के पत्थर को बनाकर अपनी सीढ़ियां
जो मंजिल पर पहुंच जाए उसे ही इंसान कहते हैं”
आज हर मनुष्य सफल होना चाहता है और सफलता के लिए जरूरी है समस्याओं से संघर्ष करना ,उसका समाधान ढूंढना।
समस्याओं रूपी की चुनौतियों का
सामना करने, उन्हें सुलझाने में जीवन का गुढ अर्थ छिपा हुआ है। समस्याएं तो एक दो धारी तलवार होती है वे हमारे साहस, हमारी बुद्धिमत्ता को ललकारती है और दूसरे शब्दों में हम सभी में साहस और बुद्धिमानी का सृजन भी करती है। मनुष्य की तमाम प्रगति उसकी सारी उपलब्धियों के मूल में समस्याएं ही हैं। यदि जीवन में समस्याएं नहीं हो तो शायद हमारा जीवन नीरसता से भर जाएगा।
किसी भी समस्या को हल करने के लिए पांच मुख्य कदम
को हम उठाते हैं।
*समस्या की पहचान बखूबी कर लेना चाहिए।
*समाधान का पूर्ण रूप से मंथन कर लेना चाहिए।
*प्रत्येक संभावित समाधान का विश्लेषण अच्छी तरह से कर लेना चाहिए।
*समाधान को चुनकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
*और तब उस पर प्रयास करना चाहिए।
“एक मनुष्य के कठिनाइयों की जरूरत होती है क्योंकि तभी वह सफलता का आनंद भरपूर ले सकता है”
“मुश्किलें केवल बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है क्योंकि
वो लोग ही बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं”
जिस प्रकार बारिश होने पर सभी पक्षी अपना ठिकाना ढूंढते हैं। लेकिन एक बात बारिश से बचने के लिए बादलों से ऊपर उड़ता है। समस्याएं तो सभी के सामने आती हैं, लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उसका सामना कैसे करते हैं।
‘मनुष्य का विचार धन है, हिम्मत रास्ता है, और कड़ी मेहनत समाधान है।
“एक निराशावादी को हर अवसर में कठिनाई दिखाई देती है जबकि एक आशावादी को हर कठिनाई में अवसर दिखाई देता है।’मानव परिस्थितियों का गुलाम नहीं, बल्कि वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है।
मनुष्य की किसी भी समस्या का समाधान स्वयं उसी मनुष्य के पास है, जिसकी वह समस्या है।
अगर समस्या का हल स्वयं पूरे लगन और निष्ठा के साथ ढूंढना चाहिए। यही हमारी समस्या का समाधान है और तभी हम उसे दूर भी कर पाएंगे।
” विपरीत परिस्थितियों में कुछ लोग तो बिल्कुल टूट जाते हैं, तो कुछ लोग रिकॉर्ड ही तोड़ देते हैं।
डॉ मीना कुमारी परिहार













