
हे माँ दुर्गा, जय माँ भवानी
सुनो माँ, भक्तों की कहानी
क्या बताऊँ अपनी जीवनी
तु तो है माँ अंतर्यामी ।
ऐसे नित करता हूँ ध्यान जाप
साल मे एक बार विशेष रूप से आप
देते हो खुशियाँ हजार
बनकर नया त्यौहार ।
आप है सबके माता
हरेक किसी के भाग्य विधाता
दुर्जनों को करते हैं नाश
भक्तों को पूरा करते हैं आश ।
समस्त भक्त करता है विनती
दुराँ करो माँ , सब का विपति
आप ही हो माँ एक सहारा
दुजा कोई नही है हमारा
सारा जगत को करत है आप कल्याण
सारे भक्त धरते है आपका ही ध्यान
मै भक्त मूर्ख नादान
लिखा उतना, जितना था ज्ञान ।
चुन्नु साहा पाकूड़ झारखण्ड













