Uncategorized
Trending

हे माँ दुर्गा!

हे माँ दुर्गा!
आज तुम्हारे दरबार में कुछ सवाल लेकर आई हूँ,
न शिकायत है, न अविश्वास,
बस तुम्हारी बनाई इस दुनिया को समझना चाहती हूँ।

माँ, तुम शक्ति हो, फिर स्त्री इतनी विवश क्यों है?

तुम करुणा हो, फिर संसार में इतनी संवेदनहीनता क्यों है?

तुम्हें नौ दिनों तक पूजते हैं,
फिर साल के बाकी दिनों में स्त्री का सम्मान कहाँ खो जाता है?

तुम्हें चुनरी चढ़ाते हैं,
फिर किसी बेटी की अस्मिता पर आँच आए तो
हमारी आवाज़ क्यों नहीं उठती?

तुम्हें शेरोंवाली कहते हैं,
फिर तुम्हारी बेटियों को अपने ही घर में
डरकर जीना क्यों पड़ता है?

माँ, तुम्हारे लिए नौ दिन व्रत रखे जाते हैं,
मंदिर सजते हैं, भजन गाए जाते हैं,
फिर तुम्हारी ही किसी बेटी के आँसू
लोगों को दिखाई क्यों नहीं देते हैं?

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *