
जय माँ शारदा
विधा- मरहटा छंद
जय जगततारिणी,कष्टहारिणी, सर्वगुणी गुणवान।
जग पालनहारी,मंगलकारी,महाबली बलवान।।
ब्रम्हांड निकाया, अद्भुत माया,जग जीवन प्रतिमान।
जय मातु भवानी, शुभ वरदानी,परम ब्रह्म का ज्ञान।।
जय जय अविनाशी, घट-घट वासी, महिमा अमित महान।
जय पाप नाशिनी, मोक्षदायिनी,सकल गुणों की खान।।
जग की महरानी,शिव पटरानी,काटो सब व्यवधान।
कात्यायन तनया,देवी अभया, दो चरणों में स्थान।।
मातु कात्यायनी,जग विधायिनी, आदिशक्ति अवतार।
दानव संहारी,जन हितकारी,सकल जगत आधार।।
जय जगत नियंता,जन अभियंता,जग की पालनहार।
त्रैलोक्य स्वामिनी,सत्यभामिनी,सुखद स्वप्न साकार।।
कर में अक्षमाला,नयन विशाला,सिर पर चुनरी लाल।
कंचन सी काया,शीतल छाया,घन घुँघराले बाल।।
कर सोहे भाला, खड्ग निराला, अनुपम स्वर्णिम ढाल।
शुभता शुभकारी,भव भयहारी, करतीं सदा निहाल।।
माँ शक्ति स्वरूपा,रूप अनूपा,कमल सुशोभित हाथ।
पग पायल प्यारी,चोटी न्यारी, कुमकुम टीका माथ।।
ब्रज की अधिष्ठात्री,शुभ वरदात्री, ऊंची जग में शान।
जन जन की माता,मोक्ष प्रदाता, करूं नित्य यशगान।।
राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













