Uncategorized
Trending

जिंदगी का सफ़र

रब जाने जिंदगी के सफर की इंतिहा क्या होगी
या तो कट जायेगा या खत्म यहाँ होगी

सिला जीने का मेरे मालिक क्या चुकाना होगा
जमीर से जाऊँ या जहाँ से जाना होगा

रजामंदी जीवन का अब एक दस्तूर बन गया
जीने का नाफरमान सबब बन गया

क्या मरने का ही असल नाम जीना है
दिल पत्थर दिमाग बंद बस गम पीना है

करम नसीब का धोखा ही जीवन का पैमाना है
रंज सिला क्या करें किससे करें सब बेजा फँसाना है

सुनवाई इस दरबार में ए बदनसीब मयस्सर नहीं है
मनचाही किस्मत जहाँ के रोजे में तसव्वुर नहीं है

जी रहे कि वो जी रहे है तलबगार खुदा कसम कोई नहीं है
फ़र्ज़ ईमान की सलाहियत है इबादतगार कोई नहीं है

जीवन है मायूषी का खेल है
खेलने का ही बस रेलमपेल है


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *