
उज्ज्वल भारत की अपनी, शुभ अभिलाषा हिन्दी है,
बहुत सरल, मीठी-मीठी, दूध बताशा हिन्दी है।।
अंग्रेजों की चालों से, बनी तमाशा हिन्दी है,
कठिन उपेक्षा होती तो भी, पर न निराशा हिन्दी है।।
अपनी भाषा हिन्दी है, उज्ज्वल आशा हिन्दी है,
सही एकता की सूझ यही, सच्ची परिभाषा हिन्दी है।।
जिसके शब्दों के बल का, जन-जन धारा हिन्दी है,
हिन्दुस्तान की जान है हिन्दी, भारत की पहचान है हिन्दी।।
कविता 2 : भारत माता और हिन्दी
गूंज उठे हिन्द की धरती, हिन्दी के जयगानों से,
घोषित, पूजित, रक्षित हो, बालक, वृद्ध, जवानों से।।
पूरे दिल से अपनाओ, खुले आसमान को,
पर न छोड़ो धरती के स्नेह का सम्मान को।।
हिन्दी है मातृ तुल्य हमारी,
इस पर न्यौछावर करो जिन्दगी सारी।।
हिन्दुस्तानी हैं हम, गर्व करो हिन्दी पर,
सम्मान देना, दिलाना — कर्तव्य है हम पर।।
कलम से – नंदकिशोर गौतम
(माध्यमिक शिक्षक)
शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय – बकोड़ी
विकासखण्ड – कुरई, जिला – सिवनी (म.प्र.)
मो. नं.













