Uncategorized
Trending

रूप का दीप

​कार्तिक मास की चौदस आई,
रूप का पर्व सुहाना लाई,
बनी है दुल्हन छोटी दिवाली,
तिल का तेल और उबटन लगाई,

​नरक का भय मिटाने को,
यम का दीप जलाने आई ,
शुभ और सुंदरता की खातिर,
यह दुल्हन गुनगुनाने आई।

​तन-मन चमक उठे आज,
ऐसे दीप जलाने आई,
सौंदर्यता और तेज बढ़े,
जीवन को महकाने आई।

​दिवाली की यह पूर्व संध्या
यही हमें बतलाने आई।
हर घर में हो मंगल सबका,
देवी लक्ष्मी है मुस्काई।

नरकासुर का वध हुआ था,
आज यही बतलाने आई,
सत्य की जीत होती हमेशा,
बस यही समझाने आई।

छोटी दिवाली है आई ,
खुशियों का संदेश है लाई,
मिलकर बनाओ यह त्यौहार,
घड़ी यह देखो पावन आई।

कार्तिक मास की चौदस आई,
रूप का पर्व सुहाना लाई,
बनी है दुल्हन छोटी दिवाली,
तिल का तेल और उबटन लगाई।

        रीना पटले (शिक्षिका) 
        सिवनी (मध्यप्रदेश)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *