
अनायास ही कुछ नही है यहाँ होता ये लो तुम जान।
जो भी घटित होती है घटना वो है विधि का विधान ।।
विधि विधान को तो हम नही देख पाते, लेकिन सचेत तो है रह सकते।
अतः सोच समझकर ही कदम है बढ़ाये जिससे गलती से बच है सकते।।
गलतियाँ जैसे ही हमसे है होते, बढते है अधर्म ।
अधर्म बढते ही खत्म है होती मन से हमारी शर्म ।।
फिर तो अधर्म का ही राज है होता,, हमारे मन मस्तिष्क में ।
और राह थाम लेते है हम ,खुद को चले जाते है नास्तिक मे।।
जब होश संभालते है तो,,, देर बहुत चुकी है होती।
पछताते है,कहते है,रोते है कि,, ये अनायास ही घटना घटी
चुन्नू कवि कर देते है पहले से ही ईत्तिला कि ,रहो सदा सचेत।
सबकुछ पूर्व से तय है, फिर भी कदम रखो ,,देख देख।।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













