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हास्य व्यंग्य

मोहब्बत का अंजाम

मैं तेरी मोहब्बत में ये हाल कर आया हूँ,
टांग टूटी, हाथ टूटा, सर से लहू बहाया हूँ।
एक दिन तेरी गली से जब गुज़रा था मैं,
दिल में अरमान और आंखों में सपना लाया था मैं।

ऊपर छत पर तू खड़ी थी चांद सी,
और नीचे मोहल्ला जमा था फौज सी।
तूने नाज़ से फरमाया था,
“बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है”
और तेरे भाई ने फरमान सुनाया था,
“पहले इसको अस्पताल पहुंचाओ, फिर मिलवाओ”

डॉक्टर बोला “फ्रैक्चर है दो जगह”,
मैं बोला “इश्क़ है, ये तो होना ही था”।
नर्स बोली “पट्टी बांध दो”,
मैं बोला “तेरे नाम की मेहंदी लगवा दो”।

लोग पूछते हैं “मिली या नहीं?”
मैं हंस कर कहता हूँ “मिल गई”
एक्स-रे में, प्लास्टर में, और दवाई की पर्ची में…
तेरी मोहब्बत हर जगह मिल गई।

अब कोई पूछे “इश्क़ क्या है?”
तो मेरा पता दे देना,
टूटी टांग, टूटा हाथ,
और सर पर “तेरा नाम” लिखा पट्टा दे देना।

बहारों फूल मत बरसाना,
बस दुआ करना कि अगली बार,
तेरी गली में जाऊं तो,
सिर्फ दिल टूटे… हड्डी ना टूटे। 😂


अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि, व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र)

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