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ख्वाहिशें तेरी-मेरी

ख्वाहिशें तेरी-मेरी,
जैसे नदी के दो किनारे ,
मिलना भी ज़रूरी है,
और दूरी भी है प्यारे।

एक धुन है हवा में,
जो हमको पास बुलाए,
ये इज़हार-ए-मोहब्बत,
अब न चुप रह पाए।

तेरी आँखों में इक सपना है,
जिसे मेरा दिल सच माने।
मेरी साँसों में जो खुश्बू है,
वो तेरे ही नाम को जाने।

रंग तेरा-मेरा,घुल जाए ऐसे,
जैसे शामों में, सूरज समाये।
ये इज़हार-ए-मोहब्बत,
अब न चुप रह पाए।

ख्वाहिशें तेरी-मेरी,
जैसे नदी के दो किनारे,
मिलना भी जरूरी है,
और दूरी भी है प्यारे।

तुम बन जाओ चांद मेरे,
और मैं तेरी चकोर बन जाऊं,
जब भी खोलूं आंखें अपनी,
बस तुम्हें नजदीक ही पाऊं।

अब मेरी बस एक तमन्ना,
तेरे दिल में अपना घर बनाऊं।
तेरी हर ख़ुशी मेरी मंज़िल,
तेरा हर ग़म मेरा साया।

तेरे मेरे प्रेम की गाथा,
पुरवइयां भी दोहराएं,
ये इज़हार-ए-मोहब्बत,
अब न चुप रह पाए।

कभी हँसना, कभी रोना,
संग-संग चलना,संग खोना।
छोटी-छोटी बातों में,
इश्क़ का गहरा समंदर होना।

ख्वाहिशें तेरी-मेरी,
जैसे नदी के दो किनारे,
मिलना भी जरूरी है,
और दूरी भी है प्यारे।

एक धुन है हवा में,
जो हमको पास बुलाए,
ये इज़हार-ए-मोहब्बत,
अब न चुप रह पाए।

रीना पटले (शिक्षिका)
जिला -सिवनी (मध्य प्रदेश)

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