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ठंड की सुबह


​विधा – हास्य कविता

ठंड आ गई,अब रोज़ न नहाना,
पानी को बस दूर से ही ललचाना!
साबुन भी बोले,”आज रहने दो यार,”
कंबल में ही है सच्चा वाला प्यार!

अलार्म बजे,पर आँख न खोले,
बाहर का मौसम,बस यही बोले।
“क्यों लेते हो रिस्क,क्यों करते हो पाप,
नहाने से पहले ले लो अपना माप।”

स्वेटर पहनो, ऊपर से जैकेट,
सफाई का अब,नहीं कोई टारगेट।
हफ्ते में एक बार,वो भी है बड़ी बात,
गरम पानी की कर लो,बस थोड़ी सी बात।

मम्मी-पापा कहें,”बेटा,कब नहाओगे?”
हम कहें,”मम्मी,आप ही बताओगे?”
आज नहीं,कल,फिर परसों का वादा,
ठंड कम हो जाए,तो कर लेंगे इरादा।

परफ्यूम की बोतल,बन गई है साथी,
खुशबू से ही कर लेते हैं दिन की शुरुआती।
नहाने का डर सबको सताता है,
कौन कहता है,जो रोज़ नहाता है?

ठंड आ गई,अब रोज़ न नहाना,
पानी को बस दूर से ही ललचाना!
साबुन भी बोले,”आज रहने दो यार,”
कंबल में ही है सच्चा वाला प्यार!

रीना पटले(शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा
सिवनी, मध्य प्रदेश

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