
प्रकृति की सुंदरता हर क्षण मुझको भाती है।
इठलाती-मुस्कुराती भोर जब मुझको जगाती है।।
प्रेरणा से भरे मन में खूबसूरत विचार लाती है।
हर बार मेरे भविष्य को हीरे के समान चमकाती है।।
सूर्य नमस्कार करते ही भीतर अद्भुत प्रकाश भर जाता है।
रवि की सुनहरी किरणों संग जब भी तन झिलमिलाता है।।
समस्त प्रकृति में आनंदमय वातावरण ऐसा छा जाता है।
तन-मन को शक्ति देने का हर शुभ दिन प्राप्त हो जाता है।।
प्रकृति की गोद में सुख-चैन भरपूर मिल जाता है।
तन-मन का उपवन बेहद हराभरा हो जाता है।।
पंछियों के मधुर गीतों का कलरव सुनाई देता है।
भौंरों की गुंजन संग फूलों का खिलना दिखता है।।
पर्वतों की ऊँचाई-अद्भुत शान निराली है।
गरमी-सरदी हर ऋतु बड़ी मतवाली है।।
सुरक्षित रखने वाला हमारा माली है।
वादियों ने हमें शांति हर पल दे डाली है।।
ठंडी हवा का झोंका शीतल रहना सिखाता है।
अमृत बेला में जागने की सही रीत बतलाता है।।
आज की नई पीढ़ी को चमत्कार करना सिखाता है।
प्रकृति के साथ सभी को स्नेह करना बतलाता है।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)













