Uncategorized
Trending

अष्टभुजा अवतार

सुबह जल्दी उठकर काम निपटाती है सारे,
बाऊ जी का गर्म पानी अम्मा की फिर चाय बनानी ।
घर में पहले लगाऊं झाड़ू फिर नहाने भी जाती हूं,
अम्मा की पूजा की थाली गर्म पानी भी तैयार करती हूं।
दफ्तर जाना है पतिदेव तो खाना भी बनाती हूं,
किसी की दवा, बस्ता, नाश्ता भी तैयार करती हूं।
रुमाल पर्स नहीं मिला उन्हें बच्चों की किताबें भी ढूंढती हूं,
उबल रही चाय किचन में शर्ट पर इस्त्री भी करती हूं।
बच्चों का नाश्ता तैयार पतिदेव का टिफिन लगाना,
मां बाऊ जी को दे चाय फिर खाना में क्या बनाना।
सबने किया आहार अपना पेट खाली पड़ा,
अष्टभुजा अवतार धर तब काम ये सम्पन्न हुआ।
कर घर की साफ सफाई कपड़ों पर मशीन लगाई,
तैयार हो जाना आफिस खुद भी वरना होगी फिर सुनवाई।
आया(बाई) निपटाती है काम साथ में ,
अपनों का ध्यान खुद ही रखना पड़ता है।
शाम होते लौटूं दफ्तर से थकान शरीर चूर होता ,
घर का बाकी काम देख मन करने को मजबूर होता ।
बच्चों की पढ़ाई अम्मा की चाय की फरमाइश,
फरमाइश सबकी पूरी करती होती दिनभर आजमाईश।
निढाल हो गिर जाती हूं दर्द से बिस्तर पर कराहती हूं,
हर रोज यही कहानी अपनों के लिए नयी सुबह फिर नयी उमंग से खड़ी है जाती हूं।
गृहणी बन घर संभालती तो कभी आसमान तक जाती हूं,
हर रूप में निष्ठावान ईमानदारी से अपना फर्ज निभाती हूं।।

प्रिया काम्बोज प्रिया

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *