Uncategorized
Trending

शिकंजा कसना( लघुकथा


श्रेयांश ओ श्रेयांश बेटा! जब भी मैं तुम्हें बुलाता हूं…तुम सुनते ही नहीं? हर वक्त मोबाइल फोन में दोस्तों फिजूल की बातें करते रहते हो..? पापा ने कहा।
श्रेयांश बहुत ही जिद्दी स्वभाव का लड़का है। मां-बाप का इकलौता लाडला, पढ़ने के नाम पर इधर-उधर बंगले झांकता है, विद्यालय जाने से जी चुराता है। सभी शिक्षकों का बुराई करता रहता है। मम्मी श्रेयांश से बहुत परेशान रहती है। मम्मी कभी नहीं सुनता है।
रसोई से मम्मी की आवाज आई-“सुनो जी! श्रेयांश को तुम्हारे लाड़ ने इसे बिगाड़ कर रखा है किसी की सुनता ही नहीं… ठीक कहती हो..अब इसे मैं ही रास्ते पर लाकर रहूंगा।”
“फिर क्या श्रेयांश पर पापा समय देने लगे साथ ही शिकंजा कसने लगे।
“श्रेयांश के पापा ने बेटे को संदेश -परक फिल्म दिखाई और प्यार से समझाया।”
“अब श्रेयांश सुबह समय पर उठ जाता है, मोबाइल को हाथ नहीं लगाता है। सभी बुरी आदतों को छोड़ देता है और समय से विद्यालय जाने लगा। विद्यालय में सभी श्रेयांश के बदले हुए रूप को देखकर अचंभित थे। श्रेयांश में बदलाव से घर में सभी खुश हो गए।

डॉ मीना कुमारी परिहार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *