
जग में ज्योति जगी जब अंधियारा छाया,
माँ ने करुणा से जीवन दीप जलाया,
भटके पथिक को सही मार्ग दिखलाया,
जय-जय माँ, तेरी महिमा अपरंपार।
दुर्गा बन दुष्टों का संहार किया है,
लक्ष्मी बन हर घर में उद्धार किया है,
सरस्वती बन ज्ञान का विस्तार किया है,
जय-जय माँ, तेरी महिमा अपरंपार।
भक्ति में शक्ति का अद्भुत संगम है,
तेरे चरणों में हर सुख का आलम है,
तेरी कृपा से मिटता हर एक गम है,
जय-जय माँ, तेरी महिमा अपरंपार।
अंबर, धरती, सागर सब तुझमें समाए,
जीवन के हर रंग तुझसे ही आए,
तेरे बिना सब सूने, सब कुछ पराए,
जय-जय माँ, तेरी महिमा अपरंपार।
दीन-दुखी का तू ही सहारा बनती,
हर संकट में बन उजियारा बनती,
ममता की तू सच्ची धारा बनती,
जय-जय माँ, तेरी महिमा अपरंपार।
— रचनाकार: कौशल













