
चैत्र मास की पावन बेला, नवदुर्गा का शुभ ध्यान,
अष्टमी-नवमी संग आई, राम जन्म की पहचान।
मंगल ध्वनि से गूँज उठा, अयोध्या का हर द्वार,
जन्मे भगवान श्री राम जगत में, लेकर धर्म आधार॥१॥
कौशल्या के घर आए, जैसे साक्षात् प्रकाश,
दशरथ के घर छाया हरष, मिटा जगत का त्रास।
देवों ने भी पुष्प बरसाए, गाया मंगल गान,
धन्य हुआ वह शुभ क्षण जब, प्रकटे श्री भगवान॥२॥
नवदुर्गा की साधना में, राम नाम का संग,
शक्ति और मर्यादा मिलकर, करें जीवन रंग।
सीता-राम का पावन मिलन, आदर्शों की शान,
त्याग, धर्म और सत्य से, ऊँचा हुआ विधान॥३॥
रावण जैसे अहंकार का, करने आए नाश,
सत्य-धर्म की स्थापना का, लेकर दिव्य प्रकाश।
हर युग में देते हैं संदेश, बनो धर्म के धाम,
जीवन को पावन करते हैं, श्री रघुवर के नाम॥४॥
नवरात्रि की साधना में, जब मन हो निर्मल,
राम जन्मोत्सव मनाता है, हृदय हो उज्ज्वल।
भक्ति, श्रद्धा और प्रेम से, भर जाए हर प्राण,
राम नाम का जाप बने, जीवन का कल्याण॥५॥
आओ मिलकर गाएँ सब, राम जन्म का गान,
घर-घर दीप जलाएँ हम, करें प्रभु का ध्यान।
नवरात्रि के इस उत्सव में, यही रहे अरमान,
हर हृदय में बसें सदा, श्री राम भगवान॥६॥
जय श्री राम | जय माता दी
योगेश गहतोड़ी “यश” (ज्योतिषाचार्य एवं साहित्यकार)
नई दिल्ली – 110059













