
मर्यादा के शील प्रभु श्री राम है
सनातन के पुरौधा प्रभु श्री राम है
सब पर समान स्नेहशील आराध्य हमारे श्री राम है सन्तन के सदा सहाई देव रूपी मनुष्य प्रभु श्री राम है
अयोध्या के राजा रघुकुल के मान है
धर्म के स्थापित सर्वोच्च प्रतिमान है
त्याग तपस्या शील मर्यादा नैतिकता की खान है
ऐसे हमारे आराध्य प्रभु श्री राम है
पांच सौ बरस के बाद हर गली गली कूचे कूचे
होवे राम नाम का हल्ला
राम ही है राम ही होंगे समस्त श्रष्टि के तारणहार
जगबलिहारी भवसागर के खैवनहार चऊं ओर ही हल्ला
होवे राम नाम का हल्ला।
जय श्रीराम ।
स्वरचित एवं मौलिक
संदीप सक्सेना
जबलपुर










