
जय-जय बजरंगबली बलशाली,
भक्ति-शक्ति के तुम रखवाले।
राम नाम जिनके रोम-रोम में,
संकट हरते हर इक क्षण में॥1॥
अंजनी के लाल पवनसुत प्यारे,
दीन-दुखियों के तुम सहारे।
बालपन में सूरज को खाया,
देवों ने भी शीश नवाया॥2॥
गदा तुम्हारी शक्ति का प्रतीक,
भक्ति में तुम सबसे अधिक।
लंका जलाकर संदेश दिया,
अधर्म सदा ही हार गया॥3॥
रामदूत बन सागर लांघा,
सीता माता का दुःख बांटा।
संजनी लाकर प्राण बचाए,
लक्ष्मण जी जीवित हो पाए॥4॥
जहाँ-जहाँ राम कथा सुनाई,
वहाँ-वहाँ हनुमत छवि समाई।
सच्चे मन से जो गुण गाए,
उसके सारे संकट मिट जाए॥5॥
आओ मिलकर दीप जलाएं,
हनुमान जी को शीश नवाएं।
भक्ति, बल और बुद्धि के दाता,
तुम ही हो मेरे प्राण विधाता॥6॥
जय श्री राम | जय हनुमान
योगेश गहतोड़ी “यश”












