
पावन यह दिवस है आया,
गूँज उठा हर एक परिवेश।
जय बजरंगबली के गूंजे नारे,
भर दें मन में शक्ति विशेष॥1॥
अंजनी माता के लाल निराले,
केसरी नंदन बल के धाम।
संकट हरते, भय को हरते,
जय-जय गूँजे श्री हनुमान॥2॥
बाल रूप में सूर्य निगल डाला,
तब देख देवता भी हुए हैरान।
ऐसी अद्भुत लीला है जिनकी,
नमन करें सब श्री हनुमान॥3॥
राम नाम है जिनके प्राणों में,
भक्ति जिनकी सच्ची पहचान।
सेवा, समर्पण, त्याग की मूरत,
धरती पर हैं वही भगवान॥4॥
लंका जाकर सीता को ढूँढा,
दिया प्रभु को सच्चा संदेश।
रामदूत बन कार्य किया जो,
आज भी गूँजे उनका यश॥5॥
असुरों का संहार किया है,
जलती लंका दी पहचान।
धर्म की रक्षा की जिसने,
वही हैं वीर महान हनुमान॥6॥
लक्ष्मण के जब प्राण पड़े संकट में,
तब लाए संजीवनी तुरंत महान।
ऐसी सेवा, ऐसा समर्पण-प्यार,
नतमस्तक हो जाए सारा संसार॥7॥
जब-जब मन में भय आता है,
नाम तुम्हारा लेते, करते ध्यान।
एक स्मरण से मिटता संकट,
शक्ति भर देते हैं हनुमान॥8॥
हे बजरंगबली कृपा करो अब,
दो हमको अब भक्ति का ज्ञान।
सत्य मार्ग पर चलना सिखाओ,
बने यह जीवन पुण्य समान॥9॥
आओ मिलकर वंदन करें हम,
झुक जाए अपना हर अभिमान।
जन्मोत्सव पर गाएँ सब मिलकर,
जय श्री राम, जय हनुमान॥10॥
योगेश गहतोड़ी ‘यश’












