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देश समाज की उन्नति मजदूर से

देश समाज की उन्नति मजदूर से।
देश समाज की प्रगति मजदूर से।।

दिन-रात मेहनत करते हैं।
तन बदन से पसीना बहते हैं ।
तब जाके कहीं बिल्डिंग बनते हैं।
तब जाके कहीं सड़क ढलते हैं।।
तब जाके कहीं शहर सजते हैं ।
यह मंदिर मस्जिद ताज चमकते हैं।।
खुद दूर वो विकास की नूर से।
देश समाज की उन्नति मजदूर से।।

साधारण सा घर है साधारण रहन सहन।
खुद खाये रुखा सुखा संवारे सबके जीवन।।
हम जो करें भोजन, वही तो उगाते हैं।
रहते हैं जिस घर में वही तो बनाते हैं।।
देखो मत कभी इसको मगरूर से।
देश समाज की उन्नति मजदूर से।।

मजदूरों की करें हम सदा सम्मान ।
कभी ना करें भूल के भी अपमान।।
हर सुख सुविधा मिले ध्यान दें सरकार।
पढ़े-लिखे बच्चे, इलाज हो पड़े बीमार ।।
छोटे-छोटे सपने भी ना दिखे दूर के ।
देश समाज की उन्नति मजदूर से ।।

एक दिन भी काम ना करें आ जाए भूचाल।
छा जाए हर तरफ यहां हा हा का र ।।
बंद हो जाए सब कारखाने फैक्ट्रियां ।
मजदूरों के महत्व को समझो बड़े मियां।।
तीज तिहार प्रसाद दो ताजे अंगूर के।
देश समाज की उन्नति मजदूर से ।।

रचना कृष्ण कुमार साहू
दीपका जिला कोरबा छत्तीसगढ़ १.५.२०२६

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