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माँ तुझे प्रणाम

परसों दिनांक 30/04/2026 दिन गुरुवार को जबलपुर मे माँ नर्मदा जी मे एक क्रुज के डूब जाने से सात आठ लोग डूब के मर गये उसमे कुल चौंतीस पैंतीस लोग सवार थे रेस्क्यू मे एक मृतक माँ का अपनी औलाद को छाती लगाये हुए लाश भी सामने आयी मन गमगीन हो गया माँ का औलाद के लिए अथाह प्रेम देखकर. माँ के प्रेम पर चार लाइन लिख रहा हूँ…….

माँ तुझे प्रणाम

कलयुग हो या सतयुग त्रेता हो या द्वापर

माँ की ममता का क्या मोल सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदैव ही ऊपर

माँ तेरी हर साँस मे औलाद का ही वजूद होता है

औलाद की ही वजह से माँ तेरा दिल हँसता और रोता है

जग झूठा हो या रब रूठा हो कोई फर्क नही पड़ता है

माँ के औलाद पर आशीष के आगे यम को भी झुकना पड़ता है

माँ का रिश्ता हे रब तेरी अकीदत से भी ज्यादा फलदायी होता है

रब तू तो रूठता है माँ तेरा रूठना भी सुखदाई होता है

माँ का आशीष यूँ ही नही जगत मे पूजा जाता है

ईश्वर की नेमत लगे ना लगे माँ तेरा आशीष लग ही जाता है

रूठना नाराजगी औलाद से माँ तेरे अंतर मे होता ही नही है

अंतिम साँस तलक भी दर्द औलाद का तेरी छाती से जुदा होता ही नही है

माँ का दर्ज़ा रब से ऊपर रब भी मानते है

धरा कुछ नही तेरे आगे माँ ये ब्रम्हा भी जानते है

माँ तेरा एक नाम ही देव साधना का अदभुत सौपान है

भगवत् भक्ति चारो धाम भक्ति एक माँ तेरा ही नाम है

संदीप सक्सेना

जबलपुर म प्र

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