
धोखा खा गये,
खुद से हार गये
विश्वास जिसपर किये
वही,धोखा दे दिये,
ऐसे भी लोग है,बदलते
यही तो,समझ न पाये
सारी रहस्य,मेरे जिसे मालूम था
वक्त आते,वो पलट गये
कहते थे,लोग मुझसे
विश्वास ना रखना इसपर
लेकिन, सबकी अनसुनी कर
बेवजह का ,विश्वास किये
सत्य साबित हुए औरो की बाते
आज,धोखा खा गये;
खैर कोई बात नही,
ऐसा तो रीत है,जमाने की ही
अपना जिसे समझो,तुम
धोखा वही देता ही है ।
अब भी वक्त है,
खुद को संभल जाओ
बाकी को ,बचाये रखो
कुछ भी तो नही बिगड़ा है,समझो
नये सिरे से तु शुरूआत करो
फिर वही रंग जमेगा
जो खो दिये हो तुम,
उसे पा ही लेगा ।
लेकिन,,हाँ, इस बार
खुद को सर्तक रहना
वैसे ही लोग सा,फिर मिलेंगे
ये दुनिया है, लोग बहुत आयेंगे
वो सब भी आ सकते है,
जो धोखा तुम्हें दिये है,
बचना कैसे है,धोखेबाजो से
ये समझना,तुम्हे है ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













