
मानव जीवन तो ऐसा प्रश्न है,
जिसका उत्तर नहीं मिलता है,
मृत्यु एक ऐसा उत्तर है जिस पर
प्रश्न किया ही नहीं जा सकता है।
जीवन रूपी प्रश्न की कश्ती को
मृत्यु रूपी उत्तर मिलने तक ईश्वर
की देन मान जीवन की पतवार को
उसके हाथ में सुरक्षित दे देनी चाहिये।
हानि, लाभ, जीवन और मरण,
यश, अपयश विधि के हाथ हैं,
भाग्य प्रबल भी होता है तो क्या,
होता वही जो भगवान करते हैं।
आदित्य ईश्वर पर आस्था और
विश्वास उसकी कृपा से होते हैं,
उसके विधिविधान इस संसार की
कश्ती को निरंतर चलाते रहते हैं।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













