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जिंदगी इम्तिहान लेती है

हर कदम पर एक नया तूफ़ान देती है,
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है।
हँसने की ख़्वाहिश में आँखें भिगो देती है,
देकर ज़रा सी ख़ुशी, हर सुकूँ छीन लेती है।
हर कदम पर एक नया तूफ़ान देती है,
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है…

सोचा था कट जाएगा सफ़र हँसते-हँसते,
पर रास्तों में बिखर गए सारे रिश्ते।
जिसपे भरोसा था, वही मुख मोड़ गया,
भरी महफ़िल में हमें तन्हा छोड़ गया।
ज़ख़्म वो देती है जो दिखाई नहीं देते,
वो दर्द, जिसके शिकवे सुनाई नहीं देते।
जाने क्यों वफ़ा के बदले ये मलाल देती है,
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है…

काँच के ख़्वाब थे, पल में टूट गए,
जो कल तक अपने थे, आज रूठ गए।
उम्मीद की शमा जलाएँ तो कैसे जलाएँ?
चारों तरफ़ अंधेरे हैं, कहाँ जाएँ?
मासूम से दिल को ये पत्थर बना देती है,
ज़िंदा तो रखती है, पर जीना भुला देती है।
साँसों के बदले हर पल ये जान लेती है,
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है…

ऐ वक़्त, ज़रा धीमे चल, थक गयी हूँ मैं,
अपनों की बेरुख़ी से पक गयी हूँ मैं।
पर हारूँगी नहीं, चाहे जितने भी हो सितम ,
आँखों में आँसू और दिल में हों जितने ग़म।
पर शिकवा यही है कि ये आज़माती बहुत है,
रुला कर हमें, ये मुस्कुराती बहुत है।
हर मोड़ पर एक नया सवाल देती है,
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है।

पतझड़ का मौसम जैसे रूह में समा गया,
जो उजाला था कभी, वो अंधेरा खा गया।
अब तो अपनी ही परछाईं डराने लगी है,
ये उदासी नस-नस में समाने लगी है।
दुनिया समझती है कि हम मुस्कुरा रहे हैं,
पर हम तो बस अपना जनाज़ा उठा रहे हैं।
ये ज़िंदगी भी कितना इम्तिहान लेती है।

रीना पटले,शिक्षिका 

शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश

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