
हवाओं में आज एक अजीब सी बेचैनी थी, लेकिन हमारे इरादे फौलाद की तरह मजबूत थे। जब बेस पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का बिगुल बजा, तो हर जांबाज के जहन में बस एक ही बात थी—मासूमों के बहाए गए खून का हिसाब।
हमने अपने फाइटर जेट्स के इंजन स्टार्ट किए। वह गर्जना ऐसी थी जिसे सुनकर दुश्मन की छाती पहले ही फट जाए। जैसे ही रनवे से उड़ान भरी, दिल में प्रतिशोध का सूरज दहक रहा था। बादलों को चीरते हुए हमारा दस्ता दुश्मन के उन्हीं ठिकानों की ओर बढ़ रहा था, जहाँ बैठकर उन्होंने कायरता की साजिशें रची थीं।
आसमान से हमने देखा कि कैसे उन्होंने इंसानियत को शर्मसार किया था। लेकिन अब बारी हमारी थी। हमने उन्हें उनके ही घर में घुसकर सबक सिखाने का निश्चय किया। जीपीएस (GPS) लॉक हुआ और फिर अम्बर से वह आग बरसी कि दुश्मन को किनारे की खबर तक न लगी।
नीचे धुआं था और ऊपर हमारी जीत की हुंकार। हमने उन कायरों को बता दिया कि सिंदूर मिटाने का दुस्साहस करने वालों का अंजाम क्या होता है। हमारे विमानों की रफ़्तार और शस्त्रों की शक्ति ने यह साबित कर दिया कि भारत का हर लाल अब जाग चुका है।
जब हम वापस बेस की ओर मुड़े, तो सूरज ढल रहा था, लेकिन हमारी आँखों में ‘शौर्य की ज्वाला’ अब भी धधक रही थी। हमने उन्हें उन्हीं के नियम समझा दिए थे—कि जो निर्दोषों का रक्त बहाएगा, उसे जल की एक बूंद के लिए भी तरसना होगा। यह सिर्फ एक हवाई हमला नहीं था, यह उन बुझे हुए दीपों का न्याय था।
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश













