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प्रीत की रीत

लगे फुलों की खुशबू जब
तुम आँखें चार कर लेना

कली कोई मिल जाए तुम्हें
तो दीदार कर लेना

नयन चंचल जो हो जाए गर
उसके पास जाने से

शीतल मन को तुम अपने
धधकती अंगार कर लेना

तड़पने लगे दिल जब
मेहंदी की चर्चाओं में

पहनकर सेहरा सजाकर रथ
अपनी बारात कर लेना

स्वागत थाल का लेकर
बाजार नयनों के सजे होंगे

प्रीत की रीत में तुम उसे
सहर्ष स्वीकार कर लेना

रवि भूषण वर्मा

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