
पहला चरण जोताई प्रारंभ
धरती थी प्यासी,
गिरी पानी की बूँद,
मेघों ने छेड़ा सावन का ,
मधुर सुर-छंद।
हरियाली के लिए जरूरी ,
यह बरसात का मौसम,
खेती के लिए फिर जाग उठा ,
किसानों का आलम।
उठकर चला खेतों में ,
मेहनती किसान,
हल जोतकर बढ़ाया ,
धरती माँ का मान।
लहलहाती फसलों से सजेगा ,
खेतों में ओढ़े हरियाली की शान,
अन्नदाता की मेहनत से ,
फिर मुस्काएगा हिंदुस्तान।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली













