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मोदी सरकार के 12 वर्ष (4,399 दिन) पूर्ण : भारत की दिशा, दशा और वैश्विक प्रतिष्ठा का नया अध्याय

प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष अर्थात 4,399 दिन पूर्ण होने के अवसर पर भारत की विकास यात्रा का मूल्यांकन करना केवल राजनीतिक विमर्श का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
एक अर्थशास्त्र की अध्यापिका के रूप में मेरा मानना है कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन उसके नारों से नहीं, बल्कि उसके परिणामों से होना चाहिए। इसी कसौटी पर यदि स्वतंत्रता के बाद के भारत, 2014 के भारत और वर्तमान भारत की तुलना की जाए, तो एक व्यापक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देता है।
विभाजन से प्रारंभ हुई कठिन यात्रा
1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, किंतु स्वतंत्रता के साथ विभाजन की त्रासदी भी आई। लाखों लोग विस्थापित हुए, असंख्य परिवार टूट गए और समाज ने गहरे घाव झेले। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार के सामने चुनौतियाँ विशाल थीं।
Jawaharlal Nehru के नेतृत्व में लोकतांत्रिक संस्थाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक आधार की नींव रखी गई। यह योगदान भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किंतु समय के साथ कांग्रेस शासन की नीतियों को लेकर गंभीर प्रश्न भी उठे।
कांग्रेस युग : उपलब्धियों के साथ अनुत्तरित प्रश्न..
दशकों तक चले लाइसेंस-परमिट राज ने भारत की आर्थिक ऊर्जा को सीमित किया। उद्यमिता पर नियंत्रण, सरकारी तंत्र का विस्तार और नीतिगत जटिलताओं ने विकास की गति को प्रभावित किया।
स्वतंत्रता के छह दशक बाद भी करोड़ों परिवारों के पास शौचालय नहीं थे। बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार धुएँ वाले चूल्हों पर निर्भर थे। बिजली, स्वच्छ पेयजल और पक्के आवास जैसी सुविधाएँ व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं थीं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी 1962 का Sino-Indian War और बाद के दशकों में आतंकवाद की चुनौतियाँ लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।
2014 का भारत और परिवर्तन की शुरुआत
2014 में भारत लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था था। भ्रष्टाचार, नीति-गत गतिरोध, ऊँची महँगाई और प्रशासनिक अक्षमता जैसे मुद्दे सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में थे।
ऐसे समय में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनी और “सबका साथ, सबका विकास” का लक्ष्य सामने रखा गया।
मोदी युग की प्रमुख उपलब्धियाँ
राष्ट्रीय एकीकरण
Revocation of Article 370 स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों में एक हैं।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण
Ram Mandir का निर्माण करोड़ों भारतीयों की आस्था से जुड़ा विषय था। दशकों तक विवाद और न्यायिक प्रक्रिया में रहने वाला विषय आज एक भव्य सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुका है।
महिला सशक्तिकरण
Triple Talaq Ban को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार माना गया।
गरीब कल्याण और जीवन स्तर में सुधार
उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण
जल जीवन मिशन के माध्यम से नल से जल
प्रधानमंत्री आवास योजना
सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन
आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाएँ
इन पहलों का उद्देश्य विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना रहा।
आतंकवाद के विरुद्ध कठोर नीति
2016 Indian Surgical Strikes और 2019 Balakot Airstrike को भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक हैं।
डिजिटल भारत
यूपीआई आधारित भुगतान व्यवस्था ने भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था के वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित किया है। आज दुनिया भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अध्ययन कर रही है।
आत्मनिर्भर भारत
मोबाइल निर्माण, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में भारत की क्षमता में वृद्धि हुई है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।
अंतरिक्ष और विज्ञान
Indian Space Research Organisation की उपलब्धियों ने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया है।
आर्थिक दृष्टि से बदलता भारत
अर्थशास्त्र हमें सिखाता है कि विकास केवल GDP नहीं, बल्कि जीवन स्तर में सुधार है।
2014 में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर थी। आज भारत लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के स्तर पर पहुँच चुका है। डिजिटल भुगतान, सड़क निर्माण, रेलवे आधुनिकीकरण, हवाई अड्डों का विस्तार और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है।
वैश्विक मंच पर भारत : तब और अब
एक समय भारत वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका तलाश रहा था। आज भारत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, वैश्विक व्यापार, जलवायु नीति और रणनीतिक साझेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जी-20 की अध्यक्षता और विभिन्न देशों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं।
विकास बनाम केवल वृद्धि
एक अर्थशास्त्री के रूप में मैं मानती हूँ कि विकास का अर्थ केवल आय बढ़ना नहीं है।
जब किसी गरीब परिवार को पक्का घर मिलता है, जब किसी महिला को धुएँ से मुक्ति मिलती है, जब किसी गाँव तक पहली बार नल का पानी पहुँचता है, जब किसी छात्र को डिजिटल सुविधाएँ मिलती हैं—तब विकास आँकड़ों से निकलकर जीवन की वास्तविकता बन जाता है।
भारत @2047 : विकसित राष्ट्र का संकल्प
स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है।
यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है तो केवल सरकारों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए उत्पादक मानव पूंजी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्रीय एकता को समान महत्व देना होगा।
निष्कर्ष
भारत की यात्रा में विभिन्न सरकारों का योगदान रहा है। राष्ट्र निर्माण की नींव रखने वालों का सम्मान होना चाहिए और परिवर्तन लाने वाले प्रयासों का निष्पक्ष मूल्यांकन भी।
मोदी सरकार के 12 वर्ष (4,399 दिन) पूर्ण होने के अवसर पर यह कहा जा सकता है कि इस कालखंड ने भारत को अधिक आत्मविश्वासी, अधिक डिजिटल, अधिक सशक्त और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
आज का भारत केवल इतिहास का उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माता बनने की आकांक्षा रखने वाला राष्ट्र है। यही इस युग की सबसे बड़ी पहचान है।
© 2026 डॉ. आरती वाजपेयी

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