
जब-जब अयोध्या धाम में जाता हूँ मैं,
मन में एक नया प्रकाश पाता हूँ मैं।
सरयू की लहरें कुछ ऐसा संदेश सुनाती हैं,
सत्ययुग की आहट जैसे कानों में गुनगुनाती हैं।
रामलला के दर्शन जब भी कर लेता हूँ,
अपने सारे दुःख-चिंता वहीं धर देता हूँ।
उनकी मुस्कान में ऐसा अद्भुत नूर नज़र आता है,
मानो रामराज्य का स्वर्णिम सूरज फिर उग जाता है।
यह अनुभूति कितने दिनों तक रहेगी, मैं नहीं जानता,
समय के गर्भ में क्या छिपा है, मैं नहीं पहचानता।
पर इतना विश्वास हृदय में हर पल रहता है,
प्रभु श्रीराम का आशीष भारत पर बरसता है।
धर्म, संस्कृति और गौरव का जो मान बढ़ा है,
अयोध्या का हर कोना आज नव अभिमान बना है।
मेरे लिए तो यही रामराज्य का सुंदर स्वरूप है,
जहाँ राम नाम का गूंजता हर ओर अनूप है।
जब तक सनातन की यह ज्योति जलती रहेगी,
जब तक रामभक्ति जन-जन में पलती रहेगी।
तब तक मेरे मन में यही विश्वास रहेगा,
रामलला का आशीष और रामराज्य का एहसास रहेगा।
जय श्री राम।
आर एस लॉस्टम













